Friday, November 2, 2007

धन्य-धन्य कादम्बिनी, तुम ऐसे नाते जोड़ो।
पूर्व जन्म के रिश्ते जैसे, मोती और धागे से जोड़ो।।
पिरो पिरो कर हार अनोखा, हमको यह उपहार दिया।
जिस बान्धव को कभी न देखा, उसको उर के निकट किया।।

आपको कहानियाँ पढ़ने का शौक हो तो पढ़िए, मेरा कहानी संग्रह "आकाश अधूरा है"

मेरी गजल-
ये प्यार मेरा, दीदार तेरा, ये सब मेरी चाहत है,
ये तो मन का आकर्षण, प्यार ही मेरी इबादत है।
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मैं क्या लिखूँ, अपने हालात लिखूँ या अपने ख़यालात लिखूँ,
देता है ज़माना अपनी दुहाई, कैसे मैं अपने जज़्बात लिखूँ।
मेरा प्यार एक हकीकत है, कोई छलावा नहीं,
दिल चीर नहीं सकता अपना, कैसे मैं प्यार की सौगात लिखूँ।
मैं क्या लिखूँ--------
पल-पल कर ये जिंदगी यूँ ही गुजर जाएगी,
अब और इंतजार मुमकिन नहीं, कैसे मैं अपने सवालात लिखूँ।
मैं क्या लिखूँ--------
ये जिंदगी बन गयी है चलता हुआ कारवाँ,
अब सफर होता नहीं 'तन्हा' कैसे मैं अपने ठिकानात लिखूँ।
मैं क्या लिखूँ--------
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हर शाम भीगती है मेरी, आँसुओं की बरसात में,
आँखों में ही गुजर जाती है नींद 'तन्हा' रात में।

किसको मैं अपना कहूँ, किससे कहूँ यादों का सफर,
अजनबी है हर कोई यहाँ, अजनबी है ये सारा शहर।

मोहब्बत की दास्तान कितनी अजीब है,
जिसने दिल चुराया, वही अजीज है ।

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